रास्ते के नुमाइंदों को बता देना जनाब,
हम गिर पड़े हैं हमें उठा लेना जनाब,
हम चलते चलते थक गए थे ऐ साथी,
हम मंज़िल ना पा पाए, फट गए जूते, घिस गयी जुराब,
मंज़िलों को चाहिए जाने कैसा शबाब,
हमें ना पता थे उन सवालों के जवाब,
हम गिरे थे तो हमें उठा लेते जनाब,
दोस्तों के साथ ऐसा क्या रुबाब,
किसी ने ना उठाया रास्ते से तो हम रास्ता ही बन गए जनाब,
अब आप जाइये हम पर पैर रख कर ,
कहीं देर ना हो जाए आपको, बस कुछ और देर का ही है हिसाब।